- श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भस्म आरती शृंगार दर्शन 25-07-2026
- मानसून सत्र का समापन: मुख्यमंत्री ने गिनाईं सरकार की उपलब्धियां, विकास और जनकल्याण पर दिया विशेष जोर
- VIDEO: इंस्टाग्राम दोस्ती से शुरू हुआ हनीट्रैप का खेल, बेटे को छुड़ाने पिता पहुंचे; अश्लील वीडियो बनाकर 26 लाख की फिरौती मांगने वाले गिरोह का खुलासा
- महाकाल की पहली सवारी को लेकर प्रशासन की तैयारी तेज, 30 जुलाई तक पूरे होंगे मार्ग विकास कार्य
- महाकाल की भस्म आरती में पहुंचीं टीवी एक्ट्रेस रूपाली गांगुली, नंदी हॉल में बैठकर किए बाबा के दर्शन, बोलीं- महाकाल की कृपा से हूं यहां तक
बालगृह की छत कूदकर दो बालक भागे
उज्जैन:लालपुर स्थित शासकीय बालगृह से दो बालक छत कूदकर भाग गये। केयर टेकर को सुबह 4 बजे बच्चों की गिनती के दौरान इसकी जानकारी लगी। उन्होंने गहरी नींद में सो रहे होमगार्ड सैनिक, चौकीदार से पूछताछ की। पता नहीं चलने पर उनके घरों पर संपर्क किया और उसके बाद नागझिरी थाने जाकर अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस ने बताया कि शिवा पिता काशीराम मूलरूप से बेटमा का रहने वाला था और कुछ वर्ष पूर्व वह तोलाराम निवासी मोहनपुरा बडऩगर रोड के पास रह रहा था। उसे घर से भागने पर 23 सितम्बर को बालगृह लाये थे, जबकि ओमप्रकाश पिता कनसिंह नावडे 14 वर्ष निवासी पानीगांव कांटाफोड़ कन्नौद को 23 मार्च 19 में बालगृह लाया गया था।
बालगृह में कुल 31 बच्चे रहते हैं। शिवा और ओमप्रकाश 29 सितम्बर की सुबह 4 बजे मनोज बैरागी केयर टेकर द्वारा की गई गिनती के दौरान कमरे में नहीं मिले। दोनों बालकों के घरों पर तलाश की गई, लेकिन सुराग हाथ नहीं लगा। इसके बाद नागझिरी थाने पहुंचकर शिवा व ओमप्रकाश के अपहरण की रिपोर्ट दर्ज कराई गई। बालगृह अधिकारियों के मुताबिक दोनों बालक छत कूदकर भागे हैं।
बालगृह की हालत यह
लालपुर एकांत क्षेत्र में स्थित बालगृह से पूर्व में भी कई बार बालक खिड़की तोड़कर, दीवार तोड़कर भाग चुके हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित बालगृह में लगे सीसीटीवी कैमरे कई महीनों से बंद पड़े हैं। छत की बाउंड्रीवॉल की ऊंचाई कम होने के कारण बालक उस पर आसानी से चढ़ जाते हैं। बालगृह के आसपास सुरक्षा के लिये बाउंड्रीवॉल भी नहीं है।
ये कर्मचारी थे रात में ड्यूटी पर
बालगृह के प्रभारी परीवीक्षा अधिकारी मेहताब सिंह परस्ते ने बताया कि 29 सितम्बर की रात बालगृह में होमगार्ड जवान कमल कुमार, सूरज यादव, चौकीदार राजेन्द्र नाथ और राकेश रायकवार की ड्यूटी थी। उक्त लोग संभवत: गहरी नींद में सोये होंगे, इसी कारण बालकों के भागने की भनक उन्हें नहीं लगी।